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Friday, July 26, 2019

काश तु सच्चा सा ख्वाब हो..

दो पर्दों के दरमियाँ छिपे हैं
दिल तो हमारे शायद फिर भी मिले हैं
संकोच लेकर इच्छाओं को रोके हैं
तु और मैं ऎसे ही सही पल भर की खातिर एक दूजे को तो सोचें है...
अब आगे का कुछ  जानते नहीं मिले तो अच्छा ना मिले तो समझेंगे तु शायद ख्वाब ही नहीं था सच्चा..


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