खामोशियों में भी आवाज दे वो शोर सा है
दिल जाने क्यूँ झुका तेरी ओर सा है
ना जाने सिद्दत की चाहत है या शहादत मेरी
बस जो भी है मै तो बस तेरी ही तेरी...
नाम हर दफ़ा तेरा दोहराते हैं
तुम कुछ कहते नहीं हम फिर भी जाने क्यूँ तुमसे रूठ जाते हैं..
तुम शायद सोचते भी नहीं नाचीज़ को इतना
पर हम तुम्हें सोच सोच कर दिन बिताते हैं ...
एक तरफा है या दोतरफा ये इश्क़
पल पल यही गुत्थी सुलझाते हैं...
अब इसे सिद्दत कहो या शहादत मेरी
ख्वाबों के झरोखों से ही सही हर लम्हे में तुम्हें अपने करीब पाते हैं.....
दिल जाने क्यूँ झुका तेरी ओर सा है
ना जाने सिद्दत की चाहत है या शहादत मेरी
बस जो भी है मै तो बस तेरी ही तेरी...
नाम हर दफ़ा तेरा दोहराते हैं
तुम कुछ कहते नहीं हम फिर भी जाने क्यूँ तुमसे रूठ जाते हैं..
तुम शायद सोचते भी नहीं नाचीज़ को इतना
पर हम तुम्हें सोच सोच कर दिन बिताते हैं ...
एक तरफा है या दोतरफा ये इश्क़
पल पल यही गुत्थी सुलझाते हैं...
अब इसे सिद्दत कहो या शहादत मेरी
ख्वाबों के झरोखों से ही सही हर लम्हे में तुम्हें अपने करीब पाते हैं.....