उलझनों में जाने कितनी रातें तुम्हारी गुजरी होंगी
अपने ख्वाबों को दूर होते देख कितना बिलखा होगा तुम्हारा दिल।
कितने अश्कों को आंखो तक रोकने को अपनी चीखें दबाई होंगी।
कितनों को अपनी उलझनों का बखां किया होगा ।
जब कोई इन सबकी वजह और हल ना बता पाया होगा ।
तो तुमने कितने हताश होकर ये कदम उठाया होगा।
सोचने मात्र से ही दिल दहल जाता है।
और अंत में बस एक सवाल है तुमसे
की क्यों एक और मौका नहीं दिया तुमने खुदको?
सुशांत क्यों आखिर क्यों!!!

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