ads

Friday, August 2, 2019

मौसम की कुछ बद- घुमानियाँ

रूहानी सा शमा है बदली बदली सी लगती इसकी फिज़ा है
हवाओं ने मेरे एहसास को कुछ इस कदर छुआ है
मानो कुदरत से मिली एक दुआ है ..
अजनबी  से सुरों को गुनगुनाने लगी हूँ इस कदर चलते चलते
मानो अकेली सी इन राहों ने सुकून का एक पल सा दिया है ..
चाँदनी आसमान मे छाने लगी है इस कदर
मानो सूरज की आखिरी किरणों से चाँद की चाँदनी को नया जन्म सा  मिला है |

No comments:

Post a Comment