ads

Thursday, March 12, 2020

गुमनाम सा है

प्यार नहीं है मुझे तुझसे
ना तुझे पाने जैसी कोई चाह है
बस ये कुछ अलग वाला सा एहसास है
हर वक्त दिल को जो खले ऐसा ख्यालात है
तुझे अपने शब्दों में पिरोने की भी एक अलग ही बात है
ये भी ना जानू दिल को क्यों लाज़मी है तू
जिस गुत्थी को  जेहन भी सुलझाना चाहे वही जज़्बात है तू

No comments:

Post a Comment