Something from the Depth of heart ...
शब्द जो थमें थे लबों की खामोशी के पीछे। करने लगे कुछ इस कदर बगावत सी कि चुप्पी की चादर में मोहताज से हैं ।। यूं तो दास्तान-ऐ-बयान किया करते थे किसी रोज । आजकल दिखतें कुछ खपाह् से हैं।।
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