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Monday, May 22, 2023

आ चल उड़ते हैं



सुना है जीवन एक कठपुतली है विचारों की 

तो  इस कठपुतली को  अपनी  उँगलियों पर  नचा  कर  देख  लूँ ,

इस  रंगमंच  के  सभी  किरदारों  से  कुछ  तो नया   सा  सीख   लूँ.. 

पलटते  हैं  किस्मत  के   सिक्के  भी  इरादों  की  आँधिंयो  से ,

आ  फिर  आज  इन  अनधिनयों  से  ही  कुछ  पल  झुँझ  लूँ ..

नींद  की  आज  चाह  नहीं  तो  दिल  में  आया  क्यों  न  इन  रातों  मे  जगना  सीख  लूँ 

दूरी  मेरे  ख्वाबों  से  जाने  कितनी  है  बस  आरजू  इतनी  है   की  इन  राहों  में   चलना  सीख  लूँ 

उड़  जाऊँ   इस  कदर  अपने  पंखों  से  की  कामयाबी  के  रंगों  में  भीगना  और  भिगाना   सीख  लूँ ..

कुछ  इस  कदर  है  ऊँची  इन  ख्वाबों  की  उड़ाने की  जिंदगी  को  खुशियों  के  पल   में   डुबाना  सीख  लूँ ..

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