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Wednesday, February 15, 2023

ख़त्म होते फूलों की दास्ताँ


      जो फूल तोड़े नहीं गये वो ही खिलखिला रहे हैं 

     जिनको छुआ गया, नोचा गया, तोड़ा गया वो तो कबके ख़त्म हो गये हैं|


Thursday, February 9, 2023

धर्म और मजहब से परे


धर्म और मजहब की बात ना कर ऐ ग़ालिब
ये दीवारें तो दिल और जबान के आगे हर रोज कहीं ना कहीं गिरती हैं


Sunday, February 5, 2023

नर कूँ नीच करि डारि है

 नर कूँ नीच करि डारि है, ओछे करम की कीच
जिसका अर्थ है कि सिर्फ जन्म लेने से कोई नीच नही बन जाता है बल्कि इन्सान के कर्म ही उसे नीच बनाते हैं।


 

रैदास प्रेम नहिं छिप सकई

रैदास प्रेम नहिं छिप सकई, लाख छिपाए कोय।

प्रेम मुख खोलै कभऊँ, नैन देत हैं रोय॥