Something from the Depth of heart ...
जो फूल तोड़े नहीं गये वो ही खिलखिला रहे हैं
जिनको छुआ गया, नोचा गया, तोड़ा गया वो तो कबके ख़त्म हो गये हैं|
रैदास प्रेम नहिं छिप सकई, लाख छिपाए कोय।
प्रेम न मुख खोलै कभऊँ, नैन देत हैं रोय॥