कलाकारी का ऐसा दौर चल पड़ा है मियां
क्या सच क्या झूट समझ नहीं पा रहे हैं
एक तरफ तस्वीर का वो पहलू जो दिखाया जा रहा है
तो एक तरफ वो जो सुर्खियों के शोरों में कहीं गुम है
कुछ मुद्दे बार बार उठाए जाते तो कुछ राजों को ओझल किया जाता है
कुछ इस कदर हर एक सक्ष को
किस्से कहानियों के जालों में गुमराह किया जाता है।
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