एक तरफ महामारी की मार
तो दुजी ओर भूके पेट
मेरे देश का कल सो रहा है
फिर भी नासमझी से कुछ लोगों की
हिन्दू - मुस्लिम के मुद्दों का आह्वहन हो रहा है
कब तक ये मुद्दे हवाओं की सादगी को
ऐसे ही जहरीला बनायेंगे
जाने किस दिन धर्म- मजहब
जात- पात के आड़े इंसानियत के झंडे लहराएंगे।
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