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Sunday, April 5, 2020

नासमझी



एक तरफ महामारी की मार 
तो दुजी ओर भूके पेट 
मेरे देश का कल सो रहा है
फिर भी नासमझी से कुछ लोगों की 
हिन्दू - मुस्लिम के मुद्दों का आह्वहन हो रहा है
कब तक ये मुद्दे हवाओं की सादगी को 
 ऐसे ही जहरीला बनायेंगे
जाने किस दिन धर्म- मजहब   
जात- पात  के आड़े इंसानियत के झंडे लहराएंगे। 


Wednesday, April 1, 2020

किरदार


जबसे तू किरदार सा हुआ है
कुछ तो बदला सा है
गहराई शब्दों की बढ़ने लगी है
शायद जो कमी थी लफ़्ज़ों में वो भरने लगी है