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Tuesday, April 10, 2018

उलफत कहूँ की हिकारत इसे

ऊफ ये चाँद का नूर भी क्या क्या रंग दिखाता है...
कभी रोशन करता है आसमां को
तो कभी खुद ही अंधेरों में खो जाता है!
उलफत कहूँ कि हिकारत चाँदनी से..
इस छिपने छिपाने के खेल में बदगूमानियां दे जाता है 🌑🌕🌙🌒🌓🌔🌖🌗🌘🌛🌚🌜


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