अंधेरी रातों में ख्वाब भरी पलको की कहानी ने
दिल के सूरों को वो धुन सी दे दी
निगाहों ने निगाहों से आंँख मिचोली खेली कुछ इस अदब से की पलके भी शरम से बोझिल होली।
तेरे जाने की आहट जो सुनी
इस दिल की धड़कनों ने तो जैसे आखिरी सांँसें ही लेली।
धुंडने को जो निकले तुमको हजारों की भीड़ में ए दिल-ए-मुशाफिर
बढ़ी मेरी ओर तेरी उंगलियों को देख
जमाने ने तो हजारों तोमहत ही देदी।
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